Huawei के स्मार्टफोन को नहीं मिलेंगे ऐंड्रॉयड और दूसरे अपडेट, Google ने किया बैन

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चीन की कंपनी हुवावे (Huawei) के स्मार्टफोन इस्तेमाल करने वाले यूजर्स के लिए बुरी खबर है। अमेरिकी सरकार और चीन की कंपनी हुवावे (Huawei) के बीच चल रहा विवाद अब बढ़ता जा रहा है। खबर है

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Huawei के स्मार्टफोन को नहीं मिलेंगे ऐंड्रॉयड और दूसरे अपडेट, Google ने किया बैन

नई दिल्ली
चीन की कंपनी हुवावे (Huawei) के स्मार्टफोन इस्तेमाल करने वाले यूजर्स के लिए बुरी खबर है। अमेरिकी सरकार और चीन की कंपनी हुवावे (Huawei) के बीच चल रहा विवाद अब बढ़ता जा रहा है। खबर है कि हुवावे के नए स्मार्टफोन्स को अब Google के ऐप्स का ऐक्सेस नहीं मिलेगा। इसके साथ ही जो हुवावे का पुराना फोन इस्तेमाल कर रहे हैं उन्हें ऐंड्रॉयड ओएस अपडेट नहीं मिलेगा।

हाल ही में अमेरिकी सरकार ने हुवावे को उन कंपनियों की लिस्ट में डाल दिया है जो बिना लाइसेंस के अमेरिकी ट्रेड कंपनियों के साथ व्यापार नहीं कर सकती हैं। गूगल ने हुवावे डिवाइसेज को अपडेट ना देने का फैसला इसी आधार पर किया है। गूगल ने एक बयान जारी कर कहा, 'हम सरकार के नियमों का पालन करने के साथ ही इस मामले के सभी पहलुओं पर गौर कर रहे हैं।'

हुवावे यूजर्स पर क्या होगा असर
गूगल की तरफ से अपडेट ना दिए जाने के बाद हुवावे यूजर्स को परेशानी जरूर हो सकती है। हुवावे यूजर्स को अब गूगल के सिक्यॉरिटी अपडेट्स और टेक्निकल सपॉर्ट नहीं मिलेंगे। इसके साथ ही हुवावे के नए स्मार्टफोन्स पर YouTube और Google Maps ऐप उपलब्ध नहीं होंगे। मौजूदा हुवावे यूजर्स गूगल प्ले सर्विस को अपडेट करने के साथ ही सिक्यॉरिटी फिक्स और ऐप्स अपडेट कर सकेंगे। वहीं, जब गूगल ऐंड्रॉयड का कोई नया वर्जन लॉन्च करेगा तो वह हुवावे स्मार्टफोन्स को नहीं मिलेगा। हालांकि, हुवावे ओपन सोर्स लाइसेंस से मिलने वाले ऐंड्रॉयड ओएस वर्जन को इस्तेमाल कर सकता है।

दूसरी कंपनियों ने भी किया बैन
गूगल के अलावा कुछ और अमेरिकी कंपनियों ने भी हुवावे से साथ बिजनस पर बैन लगा दिया है। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार दुनिया की तीन बड़ी चिप डिजाइनर और सप्लायर Intel, Qualcomm और Broadcom ने भी अब हुवावे के साथ किसी भी तरह के व्यापार को तुरंत प्रभाव से रोक दिया है। इंटेल हुवावे को सर्वर चिप और लैपटॉप के लिए प्रोसेसर देता था। वहीं क्वालकॉम से हुवावे को मॉडम्स के साथ अन्य प्रोसेसर उपलब्ध कराए जाते थे।

क्या है विवाद
हुवावे को अमेरिका से साथ ही यूरोप में भी बैन किए जाने की मांग जोर पकड़ती जा रही है। पश्चिमी देशों में हुवावे का विरोध लगातार बढ़ रहा है। हुवावे का विरोध करने वालों देशों का मानना है कि नेक्स्ट-जेनरेशन 5G नेटवर्क पर हुवावे के डिवाइसेज का इस्तेमाल सुरक्षा के लिहाज से खतरनाक हो सकता है। कई देशों का मानना है कि हुवावे के प्रॉडक्ट्स के जरिए चीन उन देशों की निगरानी कर रहा है। हालांकि, इन आरोपों का हुवावे ने हमेशा खंडन किया है। हुवावे इस बारे में कई बार चुका है कि उसके डिवाइसेज से उन देशों को किसी प्रकार का खतरा नहीं है और कंपनी चीन की सरकार से अलग है। इसके बावजूद भी कई देशों ने टेलिकॉम कंपनियों को 5G मोबाइल नेटवर्क पर हुवावे के डिवाइसेज के इस्तेमाल पर रोक लगाई हुई है।

क्या करेगा हुवावे
हुवावे को इस समस्या का अंदेशा उसी वक्त हो गया था जब इस विवाद की शुरुआत हुई थी। हुवावे यह मान कर चल रहा था कि जिस तरह से यह विवाद बढ़ता जा रहा है उससे इसे अमेरिका और वहां की कंपनियों द्वारा बैन कर दिया जाएगा। इस समस्या का सामना करने के लिए हुवावे ने अपना खुद का ओएस डिवेलप करना शुरू कर दिया था और फिलहाल इसकी टेस्टिंग चल रही है। हुवावे की चीनी यूजर्स को इस बैन से खास प्रभाव नहीं पड़ेगा क्योंकि वहां पहले से ही गूगल के ऐप्स के बैन हैं। गूगल की जगह वहां Tencent और Baidu जैसी कंपनियां यूजर्स को सर्विस दे रही हैं।

Reporter: Nagity

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