पूर्वजन्म की दिव्यचेतना की पुनःप्राप्ति के लिए मिले उत्तम जन्म को किस उदाहरण द्वारा समझाया गया है ?

SHLOK Wednesday, 30 January 2019 519 0 0 0

राजा भरत, जिन्हें तीसरे जन्म में उत्तम ब्राह्मण कुल में जन्म मिला, पूर्व दिव्यचेतना की पुनःप्राप्ति के लिए उत्तम जन्म के उदाहरणस्वरूप हैं | भरत विश्र्व भर के सम्राट थे और तभी से यह लोक देवताओं के बीच भारतवर्ष के नाम से विख्यात है |

इस भौतिक जगत व अध्यात्मिक जगत (भगवद्धाम) में क्या अन्तर है ? किस प्रकार सभी वर्गों के लोगों की सारी समस्याएँ सुलझाई जा सकती हैं ?

SHLOK Thursday, 24 January 2019 327 0 1 0

इस भौतिक जगत व अध्यात्मिक जगत (भगवद्धाम) में क्या अन्तर है ? किस प्रकार सभी वर्गों के लोगों की सारी समस्याएँ सुलझाई जा सकती हैं ?

SAMPOORNA SUNDER KAND IN SANSKRIT

SHLOK Monday, 14 May 2018 545 0 0 0

त्रेतायुग में महर्षि वाल्मीकि के श्रीमुख से साक्षात वेदों का ही श्रीमद्रामायण रूप में प्राकट्य हुआ, ऐसी आस्तिक जगत की मान्यता है। अतः श्रीमद्रामायण को वेदतुल्य प्रतिष्ठा प्राप्त है। धराधाम का आदिकाव्य होने से इस में भगवान के लोकपावन चरित्र की सर्वप्रथम वाङ्मयी परिक्रमा है। इसके एक-एक श्लोक में भगवान के दिव्य गुण, सत्य, सौहार्द्र, दया, क्षमा, मृदुता, धीरता, गम्भीरता, ज्ञान, पराक्रम, प्रज्ञा-रंजकता, गुरुभक्ति, मैत्री, करुणा, शरणागत-वत्सलता जैसे अनन्त पुष्पों की दिव्य सुगन्ध है।

ब्रह्मगुप्तः

SHLOK Sunday, 22 April 2018 2143 0 197 0

ब्रह्मगुप्तः (५९८-६६८) महान् गणितज्ञः, ज्योतिषी च आसीत् । तस्य जन्म भिल्लमलपुरे अभवत् । सः हर्षमहाराजस्य राज्ये वसति स्म । अयं गणितविषये ज्योतिष्यविषये च बहूनि पुस्तकानि अलिखत् । तदीयं सुप्रसिद्धः ग्रन्थः नाम ''ब्रह्मस्फुटसिद्धान्तः'' । एतं ग्रन्थं सः ६२८ तमे वर्षे अलिखत् । अस्मिन् ग्रन्थे २५ अध्यायाः सन्ति ।

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