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त्योहारों पर विशेष विज्ञापन बनाने वाले सर्फ एक्सेल ने... होली पर एक नया विज्ञापन लॉन्च किया हैं... जिसमें हिन्दुओ की पवित्र आस्थाओं को बड़ी चालाकी के साथ... दूषित करने का प्रयास किया गया हैं...


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#सर्फ़_एक्सेल...कपड़ों को नहीं #हिंदुओं को धो रहा है,,

त्योहारों पर विशेष विज्ञापन बनाने वाले सर्फ एक्सेल ने... होली पर एक नया विज्ञापन लॉन्च किया हैं... जिसमें हिन्दुओ की पवित्र आस्थाओं को बड़ी चालाकी के साथ... दूषित करने का प्रयास किया गया हैं...

विज्ञापन एक साथ कई निशाने साध रहा हैं..

विज्ञापन के अनुसार:-
एक हिंदू बच्ची होली के दिन सायकल लेकर... गली मे निकलती हैं.... जहाँ छतों पर बच्चे बाल्टियों में रँगों से भरकर बलून रखें हुए है।
बच्ची... पूछती हैं .. रँग फेंकना हैं... फेंको... सभी बच्चे उस पर कलर बलून फेंकने लगते हैं... बच्ची गली में सायकल घुमा घुमाकर... रंगों से सरोबार हो जाती हैं।

जब बच्ची पर रँग पड़ना बन्द हो जाते है... वो साइकिल रोककर छत पर खड़े बच्चों से पूछती हैं... हो गये रँग खत्म या औऱ हैं...?

बच्चों के मना करते ही... एक घर मे से सफ़ेद झक कुर्ता पजामा पहने मुस्लिम बच्चा... बाहर निकलता हैं... जिसे हिन्दू बच्ची अपने सायकल के पीछे बैठाकर #मस्जिद छोड़ने जाती हैं... बच्चा कहता हैं #नमाज पढ़कर आता हूँ।

और उसी दौरान विज्ञापन में शबाना आजमी की आवाज सुनाई देती हैं--अपनो की मदद करने मे #दाग लगे तो "दाग" अच्छे हैं...

यहाँ #विज्ञापन ने एक साथ कई निशाने साधे हैं...

#पहला होली के #पवित्र रँगों को "दाग" कहने की चेष्टा की गई... वह भी अन्य मज़हब के लिये... बच्ची द्वारा होली के रंगों में सरोबार होना... सर्फ एक्सेल को "दाग" नजर आते है... 
एक प्रकार से नमाज की पवित्रता औऱ आवश्यकता होली के त्यौहार से अधिक महत्वपूर्ण बताने का... चतुराई पूर्वक कुत्सित प्रयास किया गया हैं।

अगर आपके मन मे विज्ञापन देखकर एक बार भी... गंगा जमुनी तहजीब... भाईचारे... बच्चों की मासूमियत... का खयाल आता हैं... तो आप बौध्दिक पाश मे जकड़ चुके है।
जहाँ आपको ऐसे भृमजाल( गंगा जमुनी तहजीब) में उलझा देना जो हैं ही नही... औऱ जो है उससे दूर ले जाना।

दूसरा #लव जिहाद... यहाँ जानबूझकर हिन्दू लड़की चुनी गई... हिन्दू लड़का भी चुना जा सकता था... लेकिन बचपन से मदद,मानवता के नाम पर हिन्दू बच्चियों... और माँ बाप के अंदर.लव जिहाद के बीज बो देना...
यही बौद्धिक आतंकवाद हैं... बच्चों के नाम पर अपना नैरेटिव सैट करना... जिसमें खुद आप उनकी मदद करे।

यहाँ एक औऱ बात ध्यान देने योग्य हैं... विज्ञापन के अंत मे आवाज शबाना आजमी की हैं... जिनका #एनजीओ #धर्मांतरण औऱ हिन्दू विरोधी गतिविधियों के लिये कुख्यात हैं।

सर्फ़ एक्सेल से एक सवाल पूछिए...

क्या सर्फ एक्सेल #मोहहरम पर ऐसा विज्ञापन बना सकता हैं ??...
जहाँ मुस्लिम बच्ची ... हिन्दू बच्चे को #कुर्बानी के खून के छींटों से बचाते हुए... अपने कपड़ों पर लेते हुए. #मन्दिर ले जाये... #आरती के लिये...
तब #शबाना आजमी कहे... अपनो की मदद के लिये... दाग लगे तो दाग अच्छे है।

है हिम्मत सर्फ एक्सेल में ??...

या #ईद पर जब चारों तरफ जानवर काटे जा रहे हों,, गलियों में खून बह रहा हो तब कोई #मुस्लिम लड़की उस खून में अपने पैर और कपड़े गंदे करते हुए किसी हिन्दू लड़के को #मन्दिर में पूजा के लिए लेकर जाए,,
और पीछे से शबाना आज़मी की मधुर आवाज आए--अपनों की मदद के लिए #दाग लगें तो दाग अच्छे हैं,,

है ऐसा विज्ञापन बनाने की हिम्मत सर्फ एक्सेल में??

या सिर्फ हिंदुओं ने ही अपने आपको इतना सस्ता कर लिया है कि मिलार्ड,, केजरी,, ममता,, बुद्धिजीवी,, कोंग्रेस,, मीडिया,,जेहादी,, टुकड़े टुकड़े गैंग,, वामपंथी,सेक्युलर कीड़े,, या जिसका भी दिल करे वही करो छेड़छाड़ इनकी परम्पराओं,,धार्मिक मान्यताओं से,, ये कुछ नहीं करेंगे,, मरी हुई कौम है,,

सर्फ एक्सेल का बहिष्कार कीजिए... अपनी बहुसंख्यक #आर्थिक ताकत से इसे झुकाइये... ताकि सर्फ एक्सेल ये विज्ञापन वापिस ले... औऱ भविष्य में दोबारा ऐसा दुःसाहस न करे...

और खूब होली खेलिए,,, खुशियों के रंग,, अपने त्योहारों के संग,,

#बॉयकाट_सर्फ_एक्सेल....

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