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Shri Hanuman Chalisa Bhajans By Hariharan Full Audio Songs Juke Box

श्रीगुरु चरन सरोज रज निज मनु मुकुरु सुधारि । बरनउँ रघुबर बिमल जसु जो दायकु फल चारि ॥ बुद्धिहीन तनु जानिके सुमिरौं पवन-कुमार । बल बुधि बिद्या देहु मोहिं हरहु कलेस बिकार ॥

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Sampoorna Sunder Kand in Sanskrit

त्रेतायुग में महर्षि वाल्मीकि के श्रीमुख से साक्षात वेदों का ही श्रीमद्रामायण रूप में प्राकट्य हुआ, ऐसी आस्तिक जगत की मान्यता है। अतः श्रीमद्रामायण को वेदतुल्य प्रतिष्ठा प्राप्त है। धराधाम का आदिकाव्य होने से इस में भगवान के लोकपावन चरित्र की सर्वप्रथम वाङ्मयी परिक्रमा है। इसके एक-एक श्लोक में भगवान के दिव्य गुण, सत्य, सौहार्द्र, दया, क्षमा, मृदुता, धीरता, गम्भीरता, ज्ञान, पराक्रम, प्रज्ञा-रंजकता, गुरुभक्ति, मैत्री, करुणा, शरणागत-वत्सलता जैसे अनन्त पुष्पों की दिव्य सुगन्ध है।

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ब्रह्मगुप्तः

ब्रह्मगुप्तः (५९८-६६८) महान् गणितज्ञः, ज्योतिषी च आसीत् । तस्य जन्म भिल्लमलपुरे अभवत् । सः हर्षमहाराजस्य राज्ये वसति स्म । अयं गणितविषये ज्योतिष्यविषये च बहूनि पुस्तकानि अलिखत् । तदीयं सुप्रसिद्धः ग्रन्थः नाम ''ब्रह्मस्फुटसिद्धान्तः'' । एतं ग्रन्थं सः ६२८ तमे वर्षे अलिखत् । अस्मिन् ग्रन्थे २५ अध्यायाः सन्ति ।