भोपाल। मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में आयोजित त्रिस्तरीय पंचायत कार्यशाला में पूरे प्रदेश से आए जनप्रतिनिधियों, पंचायत पदाधिकारियों और वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों ने बड़ी संख्या में हिस्सा लिया।
कार्यक्रम का केंद्रीय विषय था—स्वयं निधि से समृद्धि’, जिसके अंतर्गत पंचायतों को आर्थिक रूप से सक्षम और प्रशासनिक रूप से मजबूत बनाने की दिशा में विस्तृत चर्चा हुई।
🔷 प्रह्लाद पटेल — कैबिनेट मंत्री, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग, मध्यप्रदेश सरकार
“यह कार्यशाला भविष्य की पंचायत व्यवस्था को नई दिशा देने वाला बड़ा कदम है। हमें प्रदेशभर से शानदार सुझाव और व्यावहारिक फीडबैक प्राप्त हुए हैं। जिन बिंदुओं पर नियमों या प्रक्रियाओं में संशोधन की आवश्यकता है, वहाँ शीघ्र कार्रवाई की जाएगी।
आने वाले समय में पंचायतों के कामकाज में पारदर्शिता, संसाधन वृद्धि और प्रशासनिक स्वतंत्रता और मजबूत होगी।”
🔷 राधा सिंह — राज्य मंत्री, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग
“हमारा लक्ष्य स्पष्ट है—हर पंचायत अपनी आय स्वयं सृजित करने में सक्षम बने। ‘स्वयं निधि से समृद्धि’ की अवधारणा ग्रामीण विकास को नई दिशा देगी।
कार्यशाला में आए सुझावों से यह साफ है कि पंचायतें नवाचार के लिए पूरी तरह तैयार हैं और सही मार्गदर्शन देने पर वे अपनी वित्तीय संरचना को मजबूत बना सकती हैं।”
🔷 छोटे सिंह — आयुक्त, पंचायत एवं ग्रामीण विकास, मध्यप्रदेश शासन
“प्रदेश की कई पंचायतें अब उत्कृष्ट मॉडल के रूप में उभर रही हैं। पन्ना जिले की पंचायत द्वारा सीमित साधनों के बीच भी आय को 10–15 गुना बढ़ाने का उदाहरण पूरे राज्य के लिए प्रेरणा है।
इससे स्पष्ट हुआ है कि जब पंचायतों को निर्णय लेने की स्वतंत्रता और उपयुक्त नियम दिए जाएँगे, तो वे आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन सकती हैं।”
🔷 कामना सिंह भदौरिया — अध्यक्ष, जिला पंचायत भिंड Kamna Singh Bhadoriya
“ग्रामीण विकास का केंद्र पंचायतें ही हैं। भिंड जिले के अनुभव बताते हैं कि जब जनप्रतिनिधियों को पर्याप्त अधिकार और स्पष्ट प्रक्रियाएँ मिलती हैं तो परिणाम उत्कृष्ट आते हैं।
महिला जनप्रतिनिधियों की सक्रिय भूमिका, पारदर्शिता और डिजिटल व्यवस्था को मजबूत करना हमारी प्राथमिकता है। यह कार्यशाला पंचायतों को आत्मनिर्भर बनने की दिशा में बड़ा कदम साबित होगी।”
🔶 कार्यशाला के प्रमुख निष्कर्ष
- पंचायतों को अधिक प्रशासनिक स्वतंत्रता देने की दिशा में सहमति
- ‘स्वयं निधि से समृद्धि’ मॉडल को सभी जिलों में लागू करने की तैयारी
- संसाधन और आय के नए स्रोत विकसित करने के प्रस्ताव
- नियमों में सुधार और संशोधन पर तेज़ी से प्रक्रिया
- उत्कृष्ट पंचायत मॉडलों को पूरे प्रदेश में दोहराने की योजना
- विभागों के बीच समन्वय बढ़ाने पर ज़ोर
- डिजिटल पंचायत और पारदर्शी कार्यप्रणाली का विस्तार
इस कार्यशाला ने यह स्पष्ट कर दिया कि मध्यप्रदेश की पंचायतें अब आत्मनिर्भरता, नवाचार और सुशासन की नई यात्रा पर आगे बढ़ रही हैं।
प्रदेश में ग्रामीण विकास का यह नया अध्याय आने वाले वर्षों में बड़ी उपलब्धियों का मार्ग प्रशस्त करेगा।












